उत्तराखंड में बनने से पहले क्यों बिखर रहा आप का कुनबा?

उत्तराखंड में बनने से पहले क्यों बिखर रहा आप का कुनबा?
उत्तराखंड में बनने से पहले क्यों बिखर रहा आप का कुनबा?

देहरादून: आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा तो कर दी है लेकिन जनाधार और सड़क पर संघर्ष करने वाले नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ते जा रहे हैं। उत्तराखंड में पार्टी को खड़ा करने वाले  अनूप नौटियाल बहुत पहले ही पार्टी को छोड़ चुके हैं। उनके बाद बहुत से जनाधार वाले नेता पार्टी से जुड़े लेकिन वह ही जल्द ही चले गए।हाल ही में देवेश्वर भट्ट और दौलत कुंवर पार्टी को छोड़ चुके हैं।

आखिर क्या वजह है आम आदमी पार्टी उत्तराखंड में अभी ढंग से खड़ी भी नहीं हो सकी और उसे झटके लगने शुरु हो गए हैं। जानकार बताते हैं कि इसके पीछे दिल्ली से उत्तराखंड की राजनीति चलाने की केजरीवाल की अधिनायकवादी राजनीति है। डॉ. देवेश्वर भट्ट और दौलत कुंवर के पार्टी छोड़ने में इस बात की पुष्टि भी होती है। पार्टी छोड़ते समय संगठन के इन पदाधिकारियों ने कहा कि शीर्ष नेतृत्व ने पर्वतीय राज्य की भावना के विपरीत बाहरी क्षेत्र के व्यक्ति को राज्य का प्रभारी बनाया है, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं है।पार्टी छोड़ने वाले संगठनों में उत्तराखंड संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच, उत्तराखंड मेरा अधिकार सामाजिक संगठन, उत्तराखंड दाई मोर्चा के पदाधिकारी शामिल हैं। इन संगठनों के पदाधिकारियों ने दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात के बाद आम आदमी पार्टी में विलय कर लिया था। 
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए 350 करोड़: डॉ भट्ट
पार्टी छोड़ते समय डॉ. देवेश्वर भट्ट ने आरोप लगाया कि उनको दिल्ली बुलाकर प्रदेश अध्यक्ष बनाने का वादा किया गया था लेकिन बाद में इसके एवज में 350 करोड़ की मांग की गई (देखें वीडियो)। यह बेहद ही गंभीर आरोप है। साफ सुथरी राजनीति की बात करने वाली आप पर ऐसा ही आरोप दो साल पहले राज्य सभा चुनावों के दौरान भी लगा था जब पार्टी ने अपने दिग्गज नेता औऱ कवि डॉ कुमार विश्वास और पत्रकार आशुतोष को राज्यसभा न भेज अपने चहेते धनाड्यों को भेज दिया था। इस पर भारी बवाल भी मचा था और केजरीवाल पर रुपये लेकर राज्यसभा भेजने के आरोप लगे थे। यदि डॉ भट्ट के आपोप सही हैं तो यह उत्तराखंड की राजनीति के लिए अच्छी बात नहीं है।