2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को लाया गया भारत वापस 

2019 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को लाया गया भारत वापस 

भारत ने 2021 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को वापस बुलाया है। गृह मंत्रालय ने कहा कि भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को मज़बूत करने के लिए, सरकार ने 2018 में 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम' (Fugitive Economic Offenders Act) लागू किया। मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत ने भगोड़े अपराधियों से निपटने के लिए एक इंटीग्रेटेड, इंटेलिजेंस-आधारित और टेक्नोलॉजी-आधारित मॉडल विकसित किया है।

मंत्रालय ने बताया कि 2014 से पहले, भारत की केवल 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधियाँ (extradition treaties) थीं और आर्थिक भगोड़ों से निपटने या उनकी संपत्ति ज़ब्त करने के लिए कोई खास कानून भी नहीं था।

मंत्रालय ने जानकारी दी कि 2004 और 2013 के बीच, भारत औसतन हर साल केवल चार भगोड़ों का ही प्रत्यर्पण करा पाया, जबकि 110 प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित पड़े थे। मंत्रालय ने इस बात पर ज़ोर दिया कि पिछली सरकारों में भगोड़ों को वापस लाने की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी थी, लेकिन मौजूदा सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बना दिया है।

गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़ों के खिलाफ तीन-स्तरीय रणनीति पर ज़ोर दिया, जिसमें वैश्विक स्तर पर संपर्क, मज़बूत तालमेल और स्मार्ट कूटनीति शामिल हैं। श्री शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से गहराई से जुड़ा हुआ बताया।

इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने में काफी बढ़ोतरी हुई है और 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं।

सरकार ने 'भारतपोल' (BHARATPOL) लॉन्च किया, जो 1,400 से अधिक एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ता है, जिससे जानकारी साझा करने में लगने वाला समय घटकर 3 से 10 दिन रह गया है। मंत्रालय ने बताया कि सरकार ने 'ऑपरेशन त्रिशूल' के ज़रिए विदेश में नाम और पहचान बदलकर छिपे भगोड़े अपराधियों का पता लगाने के लिए सैटेलाइट टेक्नोलॉजी और डिजिटल फुटप्रिंट्स का इस्तेमाल किया।