कौशल प्रशिक्षण के परिणाम, रोजगार सृजन और कार्यनिष्पादन-आधारित भुगतान
भारत सरकार के कौशल भारत मिशन (सिम) के अंतर्गत, कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता संवर्धन योजना (एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) द्वारा देश भर के समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और कौशलोन्नयन प्रशिक्षण प्रदान करता है। कौशल भारत मिशन का उद्देश्य भारत के युवाओं को उद्योग से संबंधित कौशलों से सुसज्जित करके भविष्य के लिए तैयार करना है।
पिछले तीन वर्षों में से प्रत्येक वर्ष के दौरान एमएसडीई की योजनाओं के तहत विभिन्न व्यवसायों में कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का राज्यवार ब्यौरा अनुबंध में दिया गया है।
पीएमकेवीवाई के अंतर्गत, वित्त वर्ष 2015-16 से वित्त वर्ष 2021-22 तक लागू की गई योजना के पहले तीन चरणों - पीएमकेवीवाई 1.0, पीएमकेवीवाई 2.0 और पीएमकेवीवाई 3.0 में अल्पकालिक प्रशिक्षण (एसटीटी) घटक में नियोजन पर नजर रखी गई, जिसमें कुल 1.11 करोड़ उम्मीदवारों को प्रमाणित किया गया, जिनमें से 24.38 लाख उम्मीदवारों को योजना के अल्पकालिक प्रशिक्षण घटक के तहत नियोजित किया गया। इसके अलावा, पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत, प्रशिक्षित उम्मीदवारों को उनके विभिन्न करियर अवसर चुनने के लिए सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है और उन्हें इसके लिए उपयुक्त रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।
मंत्रालय ने पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत व्यापक सुधारात्मक उपाय किए हैं, जिनमें आधार-आधारित ई-केवाईसी, चेहरे का प्रमाणीकरण और जियो-टैग की गई उपस्थिति, क्यूआर-कोड वाले डिजिटल प्रमाणपत्र, स्किल इंडिया डिजिटल हब पर वास्तविक समय के डैशबोर्ड, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) के माध्यम से मूल्यांकनकर्ता और प्रशिक्षण केंद्र की मान्यता को सुदृढ़ करना, कौशल समीक्षा केंद्र के माध्यम से स्वतंत्र निगरानी, स्पष्ट प्रमुख कार्यनिष्पादन संकेतकों (केपीआई) के साथ संशोधित निगरानी दिशानिर्देश और एक मजबूत दंड और वसूली कार्यढांचा शामिल हैं।
जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया गया, निलंबन, ब्लैकलिस्टिंग, धनराशि की वसूली और अन्य कठोर उपायों सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई, जिससे योजना के तहत मजबूत जवाबदेही, सत्यापन और निगरानी तंत्र स्थापित हुए। पीएमकेवीवाई 4.0 के तहत, वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2025-26 की अवधि के दौरान 2,314.09 करोड़ रुपए की राशि का उपयोग किया गया है। इस अवधि के दौरान, प्रशिक्षकों की उपस्थिति संबंधी आवश्यकताओं का अनुपालन न करने के कारण 400 करोड़ रुपए से अधिक (उक्त अवधि के दौरान उपयोग की गई कुल धनराशि का लगभग 17.3%) का भुगतान आगे की जांच के लिए रोक दिया गया है।