केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड और एस्टोनिया की सफल यात्रा पूर्ण कीं; इससे यूरोप के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी और मजबूत हुई
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 13 से 18 जुलाई 2026 तक स्पेन, बेल्जियम, फिनलैंड और एस्टोनिया की पांच दिवसीय यात्रा पूर्ण की। उनके साथ एक उच्च स्तरीय भारतीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल भी था। इस यात्रा के दौरान उन्होंने चारों देशों के मंत्रियों, वरिष्ठ सरकारी नेताओं, व्यापारिक अधिकारियों और उद्योग जगत के हितधारकों के साथ कई उच्च स्तरीय बैठकें कीं। इस यात्रा का उद्देश्य यूरोप के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी को गहरा करना, निवेश संबंधों में विस्तार करना, प्रौद्योगिकी सहयोग को सुदृढ़ करना और व्यापार-से-व्यापार संबंधों को प्रोत्साहन देना था, साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की सफल वार्ता से मिली गति को आगे ले जाना था।
स्पेन की अपनी यात्रा के दौरान, श्री गोयल ने प्रथम उपराष्ट्रपति और अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं व्यवसाय मंत्री महामहिम श्री कार्लोस कुएर्पो कैबलेरो और उद्योग एवं पर्यटन मंत्री महामहिम श्री जोर्डी हेरेउ बोहर के साथ सार्थक चर्चाएं कीं। श्री गोयल ने व्यापारिक भागीदारी के साथ एक वार्षिक भारत-स्पेन संयुक्त आयोग की बैठक का प्रस्ताव रखा, जबकि स्पेन ने द्विपक्षीय सहयोग को सुगम बनाने के लिए एक समर्पित "भारत टीम" की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
दोनों पक्षों ने भारत के यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) और स्पेन के बिजम डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म के बीच अंतर-संचालनीयता पर तकनीकी चर्चा को आगे बढ़ाने पर भी सहमति जताई। उन्होंने ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, केमिकल, वस्त्र, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में सहयोग के महत्वपूर्ण अवसरों की पहचान की। चर्चा में निवेश सुविधा, पेशेवरों की आवाजाही और लैटिन अमेरिका में संयुक्त निवेश पर भी चर्चा हुई, जिसमें यूरोप और लैटिन अमेरिका के लिए भारत के प्रवेश द्वार के तौर पर स्पेन की रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाया गया। श्री गोयल ने 'मेक इन इंडिया' पहल के अंतर्गत प्रमुख सी-295 विमान कार्यक्रम और प्रवासन व गतिशीलता साझेदारी और सामाजिक सुरक्षा समझौते पर हुई प्रगति का स्वागत किया।
भारत-स्पेन व्यापार मंच को संबोधित करते हुए, श्री गोयल ने व्यवसायों से भारत-ईयू एफटीए से मिलने वाले मौकों को अधिकाधिक करने के लिए शीघ्र साझेदारी बनाने का आह्वान किया और अगले दशक में द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और पर्यटन को दस गुना बढ़ाने के लिए एक महत्वाकांक्षी "10×10×10" दृष्टिकोण की रूपरेखा प्रस्तुत की।
ब्रसेल्स में, श्री गोयल ने भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद् (टीटीसी) की तीसरी मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की। उन्होंने 2026-27 टीटीसी कार्य योजना को अपनाने और 21 अतिरिक्त भारतीय मत्स्य प्रतिष्ठानों को सूचीबद्ध किए जाने का स्वागत किया, जिससे मंजूर किए गए भारतीय प्रतिष्ठानों की कुल संख्या 625 हो गई है। भारत ने भारतीय जहाज पुनर्चक्रण यार्ड को सूचीबद्ध करने का मुद्दा भी उठाया और कौशल, शिक्षा व प्रतिभा गतिशीलता पर भारत-ईयू संवाद शुरू करने का प्रस्ताव रखा।
यूरोपीय परिषद् के अध्यक्ष श्री एंटोनियो कोस्टा, व्यापार के लिए यूरोपीय आयुक्त श्री मारोस शेफकोविच, जलवायु, नेट जीरो और स्वच्छ विकास के लिए आयुक्त श्री वोपके होएकस्ट्रा, कृषि और खाद्य के लिए आयुक्त श्री क्रिस्टोफ हैनसेन और यूरोपीय संसद की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार समिति (आईएनटीए) अध्यक्ष श्री बर्न्ड लैंग के साथ बैठकों के दौरान, दोनों पक्षों ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर शीघ्र हस्ताक्षर और कार्यान्वयन की दिशा में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
चर्चाओं में निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत समझौते पर चर्चा, कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (सीबीएएम) पर सहयोग, नियामक सरलीकरण, कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच, बासमती चावल, स्टील के कचरे आदि पर शुल्क में छूट जैसे विषय भी शामिल थे। श्री गोयल ने बेल्जियम की कंपनियों के लिए समर्पित प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक क्लस्टर का प्रस्ताव भी रखा और ड्रोन को रोकने वाली प्रौद्योगिकियों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में थेल्स के साथ रणनीतिक रक्षा सहयोग की संभावनाओं की खोज की। दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ के आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता को उजागर करने के लिए अधिक पूर्वानुमानित, पारदर्शी और व्यापार-अनुकूल नियामक वातावरण की जरूरत को स्वीकारा।
फिनलैंड में, श्री गोयल ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री सुश्री रिक्का पुर्रा और आर्थिक कार्य मंत्री श्री सकारी पुइस्तो से चर्चा की। चर्चा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, 6जी, क्वांटम प्रौद्योगिकी, स्वच्छ ऊर्जा, चक्रीय अर्थव्यवस्था, उन्नत विनिर्माण और नवाचार में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित रही।
दोनों पक्षों ने इस विषय पर सहमति जताई कि भारत का विशाल आकार और प्रतिभा, फिनलैंड की तकनीकी क्षमताओं के साथ मिलकर सह-विकास और सह-विनिर्माण के महत्वपूर्ण मौके प्रदान करते हैं। चर्चा में विश्वविद्यालय साझेदारी, स्टार्टअप सहयोग, प्रतिभा के आवागमन और अनुसंधान सहयोग जैसे विषय भी शामिल थे।
श्री गोयल ने केओएनई और नोकिया के नेतृत्व से भी मुलाकात की और दोनों कंपनियों को भारत में विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश में उल्लेखनीय विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने फिनलैंड की कंपनियों को वैश्विक बाजारों के लिए काम करने और दूरसंचार प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर, क्लाउड कंप्यूटिंग और कार्यबल विकास में सहयोग को गहरा करने के लिए भारत में विनिर्माण केंद्र स्थापित करने का निमंत्रण दिया।
मंत्री ने 18 जुलाई 2026 को एस्टोनिया का अपना दौरा समाप्त किया। यह दौरा 2021 में तेलिन में भारत के स्थायी दूतावास के खुलने के बाद भारत की ओर से पहला मंत्री स्तरीय दौरा था और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के बढ़ते महत्व को रेखांकित करता है। विदेश मंत्री श्री मार्गस त्साहकना के साथ हुई चर्चा के दौरान, दोनों पक्षों ने डिजिटल गवर्नेंस, फिनटेक, यूपीआई एकीकरण, ई-रेजिडेंसी, साइबर सुरक्षा और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। एस्टोनिया ने भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के शीघ्र कार्यान्वयन के लिए अपना दृढ़ सहयोग जताया और भारत को एस्टोनिया डिजिटल शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने हेतु आमंत्रित किया।
भारत-एस्टोनिया व्यापार मंच को संबोधित करते हुए श्री गोयल ने दोनों देशों के व्यवसायों को साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, स्वच्छ ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में सहयोग बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया। एस्टोनिया ने नॉर्डिक और बाल्टिक क्षेत्र के प्रवेश द्वार के तौर पर अपनी भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ साझेदारी करने में गहरी रुचि जाहिर की। इस यात्रा के दौरान मंत्री ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की और टालिन में महात्मा गांधी की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अपनी यात्रा के दौरान, श्री गोयल ने चारों देशों के व्यापारिक नेताओं, उद्योग संघों और निवेशकों के साथ व्यापक संवाद किया। चर्चाओं का मुख्य केंद्र सुदृढ़ आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण, निवेश को सरल बनाना, नवाचार साझेदारी को सुदृढ़ करना, विनिर्माण सहयोग को प्रोत्साहन देना और भारतीय एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए अवसरों का विस्तार करना था।
मंत्री ने यूरोपीय व्यवसायों को भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, विशाल घरेलू बाजार, विश्व स्तरीय डिजिटल सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कुशल कार्यबल और स्थिर नीतिगत वातावरण का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे भारत को उनके पसंदीदा विनिर्माण, नवाचार और निर्यात केंद्र के तौर पर स्थापित किया जा सके।
इस यात्रा ने यूरोप के साथ भारत के बढ़ते आर्थिक संबंधों को नई गति प्रदान की। यात्रा के दौरान हुए समझौतों से तकनीकी साझेदारियों को मजबूती मिलने, निवेश इनफ्लो को प्रोत्साहन मिलने, भारतीय निर्यातकों के लिए बाजार पहुंच में सुधार होने और भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार होने की उम्मीद है।