इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में हिमालयन मीट का आयोजन, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने किया संबोधित

इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में हिमालयन मीट का आयोजन, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने किया संबोधित
इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल में हिमालयन मीट का आयोजन, कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने किया संबोधित

देहरादून: दूसरे 'देहरादून इंटरनेशनल साइंस एंड टेक्नोलॉजी फेस्टिवल-2021' के अंतर्गत 'हिमालयन मीट: द डिवाइन हेरिटेज ऑफ हिमालया' का आयोजन का आयोजन उत्तराखंड विज्ञान एवं तकनीकी परिषद (यूकोस्ट) के विज्ञान धाम परिसर झाझरा में किया गया।  कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. हरक सिंह रावत, वन एवं पर्यावरण, आयुष एवं आयुष शिक्षा मंत्री उत्तराखंड सरकार ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि विश्व के किसी भी कोने में रहने वाले किसी के धर्म के हों उत्तराखंड के साथ किसी न किसी रूप में जुड़े रहते हैं, यह उत्तराखंड की जीवन्त संस्कृति की प्रासंगिकता है। उन्होंने कहा हमें उत्तराखंड को उस दिशा में ले जाना है जहां पलायन न हो, जहां बेरोजगारी न हो, इसमें योग और वैलनेस की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है और हमारी कोशिश रहे कि इसे बनाए रखें। वहीं आयुष एवं आयुष शिक्षा सचिव उत्तराखंड सरकार, चंद्रेश यादव ने कहा कि उत्तराखंड में आयुष ग्राम को विकसित करने की संकल्पना पर काम किया जा रहा है, यह उत्तराखंड में पलायन रोकने और आजीविका बढ़ाने का कारगर उपाय साबित हो सकता है।

वहीं यूकोस्ट के महानिदेशक डॉ राजेन्द्र डोभाल ने हिमालयी क्षेत्रों के विकास के लिए प्रशासनिक सुधारों पर मुख्य अतिथि का ध्यान आकर्षित किया।  श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय एवं उत्तराखण्ड तकनीकी विश्वविद्यालय,  डॉ. पीपी ध्यानी ने अपने संबोधन में इस ओर ध्यान आकषिर्त किया कि हिमालयन मीट जैसे बौद्धिक कार्यक्रमों की प्रासंगिकता तब है जब इनमें निकलने वाले निष्कर्षों को लागू किया जाए। वहीं उत्तराखंड आयुर्वेदिक कुलपति डॉ सुनील जोशी ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड को मर्म चिकित्सा और आयुष चिकित्सा का हब बनाया जा सकता है।  कार्यक्रम में उत्तरांखण्ड आयुर्वेद कॉलेज के चेयरमैन डॉ. अश्विनी काम्बोज ने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद और वेलनेस उत्तराखंड सहित हिमालयी क्षेत्रों की आर्थिकी का एक सशक्त माध्यम हो सकता है जिसे अभी और प्रसारित और विकसित किए जाने की जरूरत है।


वहीं कार्यक्रम की आयोजन समिति के सचिव कुंवर राज अस्थाना ने इस बात पर जोर दिया कि हिमालय को सुरक्षित रखना केवल इसके पर्वतों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें यहां के निवासी, जीव-जंतु, पर्यावरण और यहां के निवासियों की आजीविका को सुरक्षित रखना और बढ़ाना भी शामिल है।  कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्वानों, शोधार्थियों, विद्यर्थियों और गणमान्य लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन टीएचडीसी के इंजीनियरिंग कॉलेज की प्रो. रमना त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम का समापन प्रो. नवीन सिंघल के वक्तव्य से हुआ। कार्यक्रम का संयोजन वरिष्ठ पत्रकार श्री कुंवर राज अस्थाना, दिव्य हिमगिरी, प्रो. अनुज शर्मा हिमालयीय विश्वविद्यालय, प्रो. नवीन सिंघल, डी.आई.टी. विश्वविद्यालय और प्रो. जे.सी. पाटनी, यू.पी.ई.एस. के द्वारा किया गया।