सुनीता दुग्गल का किसानों ने किया विरोध, पूर्व सांसद कच्चे रास्ते से निकलीं, किसानों ने किया पीछा
हरियाणा विधानसभा चुनाव में प्रचार अभियान तेज है। इसी दौरान उम्मीदवारों को विरोध भी झेलना पड़ रहा है। कुछ ऐसा ही हुआ रतिया से विधानसभा चुनाव लड़ रहीं सुनीता दुग्गल के साथ। सुनीता दुग्गल रतिया विधानसभा के लांबा गांव में प्रचार के लिए जा रही थीं। इस बात का पता भारतीय किसान यूनियन खेती बचाओ की टीम को चला तो वो प्रधान सतनाम लांबा के नेतृत्व में गांव के बाहर पहुंच गई। किसानों ने यहां सुनीता दुग्गल का दो से तीन घंटे इंतजार किया लेकिन फिर उन्हें ये पता चला कि सुनीता दुग्गल की टीम उन्हें कच्चे रास्ते से ले गई है। इस पर उन्होंने वहां भी सुनीता दुग्गल का पीछा किया और स्कूल ढाणी के पास सुनीता दुग्गल को रोक लिया।
यहां किसानों ने सुनीता दुग्गल से कुछ सवाल किए किसानों ने सबसे पहले तो ये कहा कि हम आपसे कुछ सवाल पूछने आए थे और आप चोर गली से क्यों गईं। आपको पाप लगेगा। जिसपर दुग्गल ने कहा कि वो पुण्य आत्मा हैं। रास्ता बदलने की बात पर सुनीता दुग्गल ने कहा कि उन्हें नहीं पता था कि रूट क्या है?
किसानों ने सुनीता दुग्गल से कहा कि वो सवाल पूछने आए हैं। इस पर सुनीता दुग्गल ने कहा कि वो आराम से सवाल करें, वे जवाब देंगी। इसके बाद किसानों ने पूछा कि उनके शंभू बॉर्डर और खनौरी बॉर्डर पर उनके रास्ते रोके गए वो ठीक था या गलत था? इसके जवाब में सुनी
किसानों ने कहा कि वे सवाल पूछने आए हैं, जिस पर दुग्गल ने कहा कि शांति से सवाल करें, वे जवाब देंगी। इस पर किसानों ने पूछा कि उनके रास्ते रोके गए वो ठीक था या गलत था? जिस पर सुनीता दुग्गल ने कहा कि यह गलत था।

किसानों ने सुनीता दुग्गल से सबसे पहले पूछा कि 13 फरवरी को हरियाणा की बीजेपी सरकार ने किसानों का जो दिल्ली जाने का रास्ता रोका, वो ग़लत था या सही ?
इस सुनीता दुग्गल ने कहा कि ग़लत था
किसान नेता ने फिर पूछा कि बीजेपी के नेता बोल रहे हैं कि शंभू और खनौरी बॉर्डर पर बैठे हुए नकली किसान है ?
सुनीता दुग्गल ने कहा-असली किसान हैं, मैं मानती हूं।
किसान नेता फिर शुभकरण सिंह को गोली लगने से हुई मौत के बारे में पूछा कि शुभकरण सिंह को गोली मारी उसकी जांच होनी चाहिए या नहीं? इस पर सुनीता दुग्गल ने कहा कि शुभकरण सिंह को गोली मारी, उसकी जांच होगी।

किसानों ने पूछा कि सांसद रहते हुए वो क्यों नहीं आईं। इस पर सुनीता दुग्गल ने जवाब दिया कि दो साल कोरोना और एक साल किसान आंदोलन में गुजर गया। बाकी दो साल में 100 दिन उन्हें पार्टी कार्यक्रमों में जाना पड़ा। इस तरह से जब किसानों को उनके सारे सवालों के जवाब मिल गए तो किसानों ने उन्हें जाने दिया।