पहलवान बजरंग पूनिया एक बार फिर सस्पेंड, एंटी-डोपिंग एजेंसी ने 11 जुलाई तक मांगा जवाब, जानें क्या है पूरा मामला?
पहलवान बजरंग पूनिया को एंटी डोपिंग एजेंसी ने एक बार फिर से सस्पेंड कर दिया है। और नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। बजरंग पूनिया के ये जवाब 11 जुलाई तक देना होगा। डोपिंग एजेंसी ने ये कार्रवाई इसलिए की है क्योंकि बजरंग ने सोनीपत में मार्च में हुए नेशनल ट्रायल के दौरान डोप टेस्ट के लिए अपना सैंपल देने से मना कर दिया था। जिसके बाद नाडा बजरंग के खिलाफ ये कार्रवाई की है।
आपको बता दें कि इससे पहले बजरंग पूनिया को 5 मई को भी NADA ने सस्पेंड कर दिया था। उस वक्त तीन हफ्ते बाद एंटी डोपिंग डिसिप्लनरी पैनल ने उनका निलंबन रद्द कर दिया गया था। क्योंकि उन्हें उस वक्त नोटिस जारी नहीं किया गया था। अब NADA ने निलंबन तो किया ही है साथ ही बजरंग पूनिया को नोटिस भी जारी किया है।

सोनीपत में 10 मार्च के दिन ओलंपिक गेम्स में हिस्सा लेने के लिए एशियन क्वालिफायर्स के नेशनल ट्रायल्स हुए थे इसी दौरान NADA ने बजरंग से सैंपल देने के लिए कहा था। लेकिन, बजरंग ने सैंपल देने से इनकार कर दिया।
आपको बता दें कि बजरंग पूनिया वही पहलवान हैं जो दिल्ली के जंतर-मंतर पर उन महिला पहलवानों के साथ डटकर खड़े थे जिन्होंने WFI के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण पर यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए थे। जिनमें हरियाणा की ही महिला पहलवान विनेश फोगाट और साक्षी मलिक मुख्य तौर पर शामिल थीं। महिला पहलवानों ने बृजभूषण के खिलाफ बाकायदा आंदोलन चलाया जिसमें विनेश और साक्षी के हरदम बजरंग पूनिया साथ रहे। आज भी बजरंग पूनिया विनेश और साक्षी मलिक के साथ मिलकर महिला पहलवानों के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं। उस वक्त पहलवानों ने जंतर-मंतर पर धरना दिया था जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए और दिल्ली पुलिस ने बृजभूषण पर केस दर्ज किया था।

अभी इस मामले में कोर्ट में सुनवाई चल ही रही है। इस दौरान बजरंग पूनिया और विनेश फोगाट ने अपने अवॉर्ड लौटा दिए। तो वहीं साक्षी मलिक ने कुश्ती से ही संन्यास ले लिया ।

वहीं बजरंग पूनिया ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर पद्मश्री अवॉर्ड लौटाने का ऐलान किया था। 3 महीने पहले प्रधानमंत्री आवास में एंट्री ना मिलने पर बजरंग ने अपना अवॉर्ड सामने फुटपाथ पर रख दिया था। बजरंग ने कहा था, 'महिला पहलवानों के अपमान के बाद मैं ऐसी सम्मानित जिंदगी नहीं जी पाऊंगा, इसलिए अपना सम्मान लौटा रहा हूं। अब मैं इस सम्मान के बोझ तले नहीं जी सकता।'