ओमान और दुबई में फंसी 88 भारतीय महिलाएं, MP सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय को लिखा पत्र, महिलाओं की वापसी की मांग
खाड़ी देशों में युद्ध की वजह से ओमान में फंसी 88 भारतीय महिलाओं की सुरक्षित वापसी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। इन महिलाओं को युद्ध से पहले ही ओमान के शेल्टर हाउस में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इन महिलाओं की सुरक्षित वापसी को लेकर राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्रालय को एक पत्र लिखा है।
संत बलबीर सिंह सीचेवाल ने विदेश मंत्री श्री एस. जयशंकर को लिखे पत्र में कहा है कि ओमान के शेल्टर हाउस में फंसी 88 भारतीय महिलाओं और दुबई में फंसी एक भारतीय महिला को तुरंत सुरक्षित वापस लाया जाए। उन्होंने अपने पत्र में बताया है कि ये महिलाएं अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए रोजगार की उम्मीद में खाड़ी देशों में गई थीं, लेकिन धोखेबाज ट्रैवल एजेंटों ने उनसे ऐसा जबरन काम करवाया, जो उनकी मर्जी के खिलाफ था।
महिलाओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें मानसिक यातना के साथ-साथ शारीरिक शोषण भी किया गया। जब वे लौटने की कोशिश करती हैं, तो उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर रोक लिया जाता है, और उनकी रिहाई के बदले में मोटी रकम मांगी जाती है। गौरतलब है कि 28 फरवरी से ईरान पर US और इज़राइल के लगातार हमलों की वजह से इन महिलाओं के परिवार वाले परेशान हैं। खाड़ी देशों पर हमलों के दौरान ओमान में मिसाइल हमले में दो भारतीयों की मौत ने परिवार वालों की चिंता और बढ़ा दी है। जानकारी के मुताबिक, जैसे-जैसे शेल्टर हाउस में डर और दहशत का माहौल गहरा रहा है, यहां फंसी भारतीय महिलाओं के चेहरों पर चिंता की लकीरें और गहरी होती जा रही हैं।
MP संत सीचेवाल ने बातचीत के दौरान कहा कि जंग की वजह से इन परिवारों की चिंता और डर बढ़ना स्वाभाविक है। ओमान के शेल्टर हाउस में कई महीनों से रह रही भारतीय महिलाओं को जंग से पहले ही निकाल लिया जाना चाहिए था। गौरतलब है कि संसद के इसी सेशन के दौरान केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संत सीचेवाल के एक सवाल के जवाब में कहा था कि अभी ओमान में “वन स्टॉप सेंटर” (शेल्टर हाउस) में 88 भारतीय महिलाएं रह रही हैं, जबकि एक महिला दुबई में भी रह रही है।
विदेश मंत्रालय की तरफ से राज्यसभा में पेश किए गए डेटा के मुताबिक, पिछले छह सालों में करीब 10,526 भारतीय महिलाओं को खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत वापस लाया गया है। इन महिलाओं को ओमान, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और दुबई से वापस लाया गया है। सबसे ज़्यादा मामले ओमान और कुवैत से जुड़े हैं। साल 2021 से 2025 तक ओमान से 3,647 और कुवैत से 5,592 महिलाओं की सुरक्षित वापसी हो पाई है।
संत सीचेवाल ने अपने लेटर में दो दर्दनाक मामलों का भी ज़िक्र किया। पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब की रहने वाली किरण को ब्लड कैंसर से पीड़ित अपने बच्चे के इलाज के लिए ओमान जाना पड़ा। इसी बीच, जनवरी 2026 में किरण के बच्चे की मौत हो गई। पीड़ित परिवार ने 10 दिनों तक बच्चे का अंतिम संस्कार नहीं किया, इस उम्मीद में कि किरण ज़रूर वापस आएगी और अपने बच्चे को आखिरी बार देखेगी, लेकिन ट्रैवल एजेंट किरण की वापसी के लिए लाखों रुपये मांग रहे हैं। किरण का परिवार इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ है। इसी तरह, तरनतारन जिले की रहने वाली पूजा नाम की एक महिला जो ओमान गई थी, उसके पति की मौत हो गई। वह भी समय पर वापस नहीं आ सकी। दोनों ही मामलों में, परिवारों को उसकी गैरमौजूदगी में ही अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।