मुख्यमंत्री भगवंत मान के मिशन तहत रोजगार के मिल चुकी हैं अब तक 58,962 से अधिक युवाओं को नौकरियां
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने पिछले साढ़े तीन वर्षों में युवाओं को 58,962 सरकारी नौकरियाँ प्रदान करके एक और मील का पत्थर स्थापित किया है, जिससे प्रतिभा पलायन की प्रवृत्ति उलट गई है।
ये नौकरियाँ युवाओं की तकदीर बदलने में अहम भूमिका निभाएँगी। युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरियाँ मिली हैं। यह युवाओं के कल्याण को सुनिश्चित करने और उनके लिए रोज़गार के नए अवसर खोलने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह बेहद गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार के कार्यकाल के दौरान कुछ युवाओं को दो-तीन नौकरियाँ भी मिली हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य की कमान संभालने के पहले दिन से ही उन्होंने यह सुनिश्चित किया है कि योग्य युवाओं को नौकरियाँ मिलें, जिसके चलते अब तक 58,962 से ज़्यादा युवाओं को सरकारी नौकरियाँ मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि आज 858 युवा पंजाब सरकार के परिवार में शामिल हो गए हैं और अब वे राज्य की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में सक्रिय भागीदार बनेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह राज्य के युवाओं पर कोई उपकार नहीं है, बल्कि वे अपनी योग्यता के आधार पर इन नौकरियों के हकदार बने हैं। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया। भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि इन युवाओं को पूरी तरह से योग्यता के आधार पर नौकरियां मिली हैं। उन्होंने नवनियुक्त युवाओं से सरकार का अभिन्न अंग बनने का आह्वान किया और उन्हें पूरे समर्पण भाव से लोगों की सेवा करने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि नवनियुक्त युवा अपनी कलम का प्रयोग समाज के जरूरतमंद और पिछड़े वर्गों की मदद के लिए करेंगे। उन्होंने कहा कि नवनियुक्त युवा लोगों का अधिक से अधिक कल्याण सुनिश्चित करें ताकि समाज के हर वर्ग को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि यह बहुत गर्व और संतोष की बात है कि राज्य सरकार ने अब तक 58,962 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं और यह भी कहा कि सभी भर्तियां पूरी तरह से योग्यता के आधार पर की गई हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ये भर्तियां पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से की गई हैं और युवाओं ने कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करके ये नौकरियां हासिल की हैं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार का पहले दिन से ही एकमात्र एजेंडा युवाओं को सरकारी नौकरियाँ देकर उन्हें सशक्त बनाना रहा है। उन्होंने कहा कि आज पंजाब दिवस है, लेकिन क्या यह सचमुच खुशी का क्षण है क्योंकि इसी दिन राज्य को कई हिस्सों में बाँट दिया गया था?
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने राज्य के युवाओं को नौकरियाँ देने की कभी परवाह नहीं की, क्योंकि उन्हें केवल अपने परिवारों की चिंता थी। भगवंत सिंह मान ने कहा कि उनकी सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा न मिलने से हताश विपक्ष अपने निजी स्वार्थों की पूर्ति के लिए उन्हें बदनाम कर रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष की ये घिनौनी साजिशें कभी कामयाब नहीं होंगी क्योंकि राज्य की जनता उनकी घिनौनी चालों से अच्छी तरह वाकिफ है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के छात्रों ने नीट, जेईई और जेईई एडवांस जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाएँ पास करके जमीनी स्तर पर बदलाव के प्रयासों पर अपनी मुहर लगाई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे के कारोबार को संरक्षण देने वाले नेता पहले ही सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं और कहा कि ये नेता न केवल राज्य भर में नशे के कारोबार को संरक्षण देते थे, बल्कि सुनने में आया है कि ये अपने सरकारी वाहनों में भी नशा बेचते/आपूर्ति करते थे। भगवंत सिंह मान ने कहा कि पहले इन प्रभावशाली नेताओं को गिरफ्तार करने की किसी ने हिम्मत नहीं की, लेकिन उनकी सरकार ने ऐसा करके दिखाया है और अब उन्हें अपने पापों की कीमत चुकानी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि जब उक्त अकाली नेता को गिरफ्तार किया गया, तो विपक्षी राजनीतिक दलों के नापाक गठबंधन का पर्दाफाश हो गया, जिन्होंने मानवाधिकारों के उल्लंघन का नारा लगाकर आरोपियों के लिए विशेष सेल और सुविधाओं की माँग करने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने अफ़सोस जताया कि एक सुनियोजित साज़िश के तहत पराली जलाने के नाम पर राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के लिए पंजाब को बदनाम किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता इससे कहीं अलग है। भगवंत सिंह मान ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए पंजाब को दोषी ठहराने वाले यह भूल जाते हैं कि हरियाणा, पंजाब और राष्ट्रीय राजधानी के बीच स्थित है, फिर भी कोई इस पर उंगली नहीं उठा रहा है। उन्होंने राजनीतिक नेताओं से स्पष्ट रूप से पूछा कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) इस समय इतना खराब क्यों है, जबकि पंजाब में पराली जलाने पर रोक क्यों नहीं लगाई जा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकारों ने स्वास्थ्य व्यवस्था में बदलाव लाने की ज़हमत नहीं उठाई, क्योंकि उन्हें बहुराष्ट्रीय अस्पतालों से रिश्वत और सुविधाएँ मिलती थीं। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इन नेताओं ने केवल निजी स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को बढ़ावा दिया, जिसके कारण इन क्षेत्रों में सरकारी सुविधाएँ पिछड़ गईं। उन्होंने कहा कि हालाँकि उनकी सरकार ने इन क्षेत्रों के पुनरुद्धार पर ज़ोर दिया, जिसके कारण इन क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव देखे जा सकते हैं। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. बलबीर सिंह और अन्य भी मौजूद थे।